इसलिए ये सवाल उठाए जा रहे है की क्या अग्निवीर योजना RSS के दिमाग की उपज है ?

भारतीय सेना के दशकों पुरानी मांग और सेना द्वारा सुझाए गए भर्ती प्रक्रिया को मानते हुए भारत सरकार ने अग्निपथ योजना के जरिये अग्निवीरों की भर्ती का ऐलान किया है. इस ऐलान के बाद देश के कई जगहों पर भरी विरोध प्रदर्शन हुआ, सबसे ज्यादा उग्र आंदोलन बिहार में हुआ. इस योजना के फायदे और नुकसान के बारे में बहुत कुछ बताया जा चूका है. जितना गुमराह किया जा सकता है विपक्षी पार्टियों और मोदी विरोधी इकोसिस्टम कर चूका है, इसलिए इस योजना के बारे में ना बताकर हम आपको बताने वाले है की अग्निवीरों को RSS से क्यों जोड़ा जा रहा है ? इसका खुलासा करें इससे पहले कुछ फैक्ट रखना जरुरी है. बिहार समेत देश में जहाँ आग लगाई गई उस घटना में एक भी छात्र शामिल नहीं था. वैसे स्टूडेंट जिनका परीक्षा हो चुकी है, और जिनकी उम्र ख़त्म हो चूका है उनका उग्र होना स्वाभाविक है. लेकिन उनकी आड़ में तोड़ फोड़ और हिंसा करने वाले राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्त्ता थे.
आरोप है की बिहार में rjd नेता खुलेआम छात्रों को झूठ बोलकर भड़का रहे थे, RJD के ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से भजपा नेताओ पर हमले के लिए उकसाया गया. झारखण्ड में कांग्रेस नेता का भीड़ को भड़कते हुए खून की नदिया बहाने की बात करते हुए वीडियो वायरल हुआ है. उत्तर प्रदेश में युथ कांग्रेस NSUI का जिला अध्यक्ष हिंसा के आरोप में गिरफ्तार हुआ. आरोप है की उसने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर छात्रों को भड़काया और हिंसा की. सरकार नौकरी की तयारी कर रहा हर छात्र यह बात जनता है की किसी भी वजह से अगर उसके नाम पर कोई मुकदमा हो गया तो उसका पूरा करियर ख़त्म हो जाएगा. हालाँकि इस हिंसा की सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार का मिस्सकमुनिकेशन है. जिस दिन इसका ऐलान हुआ उसी दिन सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सारी बातें स्पष्ट तरीके से बता दिया गया होता तो छात्र भ्रमित नहीं होते और राजनीतिक दलों को मौका नहीं मिलता.
नरेंद्र मोदी का विरोध करते करते पार्टियां और नेता कई बार देश का विरोध करने लगते है, पिछले 7 साल में सेना के हर उस कदम पर घटिया किस्म की राजनीती की गई है. सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, राफेल डील हो या cds की नियुक्ति, हर बार सेना को निचा दिखने की कोशिश की गई. इस बार संवैधानिक मर्यादाओं को लांघते हुए पार्टिया और नेता सेना प्रमुखों पर सवाल उठा रहे है. अग्निपथ योजना के जरिये आंदोलन और मोदी सरकार को गिराने का ख्वाब देखने वालों ने एक नया टूलकिट तैयार किया है. इसके जरिये सेना को RSS से जोड़कर देश में सेना के खिलाफ माहौल बनाने की तयारी चल रही है. इसी क्रम में कर्णाटक के पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि अग्निपथ के जरिए सेना पर नियंत्रण करने के लिए आरएसएस का छिपा हुआ एजेंडा है. नाजी आंदोलन की शुरुआत अग्निपथ से होगी और अग्निवीरों का प्रयोग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आरएसएस कार्यकर्ता सेना के अंदर और बाहर भी अग्निवीर बन जाएंगे. बंगाल की मुख्यमंत्री एक कदम और आगे जाते हुए आरएसएस के साथ बीजेपी को भी जोड़ दिया. ममता ने अग्निवीर को पार्टी कैडर तैयार करने की योजना बताया. सोशल मीडिया पर इकोसिस्टम इसे साबित करने के लिए कई तरह के कुतर्क गढ़ रहा है.
दरअसल इस योजना से विपक्ष के डरने के कई कारन है. अग्निपथ योजना के साथ 10 लाख सरकारी नौकड़ी सिर्फ डेढ़ साल में देने का ऐलान हुआ है, इसके साथ ही अगले तीन साल में अग्निपथ के माध्यम से हर साल लगभग डेढ़ लाख अग्निवीरों की भर्ती होगी. यानी अगले दो साल में विपक्ष के पास मौजूद सबसे बड़ा हथियार रोजगार मुद्दा भी हाथ से निकल जाएगा. लेकिन उनका असली डर यानी सेना का rss से कनेक्शन वाजिब है और उनकी राजनीती के लिए घातक भी. अगले 10 साल में देश में लगभग 12 लाख अग्निवीर तैयार हो जाएंगे, जिनमे से सबसे बेस्ट को सेना में परमामेंट सेवा का मौका मिलेगा. उनके अलावा जो अग्निवीर बाहर आकर समाज के अलग अलग हिस्सों में रहेंगे वो इस देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े एसेट्स साबित होंगे. ये बात तो खुद वामपंथी और कट्टर भी मानते है की भारतीय सेना का हर जवान देशभक्त होता है. एक दो अपवादों को छोड़ दें हर सैनिक के लिए देश प्रथम होता है. इसलिए 4 साल बाद वो बाहर आकर समाज के लिए खतरा बन जाएंगे इस तरह का नैरेटिव अभी से बनाया जा रहा है. मतलब सीधे सीधे यह नहीं कह सकते की आने वाले समय में समाज और देश में राष्ट्रवादियों का विमर्श बढ़ेगा शायद इसलिए RSS से जोड़ा से जोड़ा जा रहा है. क्यूंकि आरएसएस देश और राष्ट्रवाद की बात करता है.इसलिए ये सवाल उठाए जा रहे है की क्या अग्निवीर योजना RSS के दिमाग की उपज है ?
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