Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

यूक्रेन में फंसा भारत : छात्र या सरकार किसकी गलती की सजा देश भुगत रहा है ?

 यूक्रेन में फंसा भारत : छात्र या सरकार किसकी गलती की सजा देश भुगत रहा है ?



रूस यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से ज्यादा भयंकर प्रोपोगंडा वॉर भारत में चल रहा है ! इस लड़ाई में भारत इकलौता देश है जो बुरी तरह से फंस गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह वहां फंसे हुए भारतीय छात्र और अन्य लोग है. दुनिया का कोई भी युद्ध सिर्फ लड़ाई के मैदान में नहीं लड़ा जाता, उसके अलावा एक मनोवैज्ञानिक युद्ध भी लड़ा जाता है. भारत में एक युद्ध हो चल रहा है, प्रोपोगंडा युद्ध ! ये जंग लेफ्ट और राइट के बीच हो रही है. एक धरा सरकार (मोदी) को फेल बता रहा है तो कुछ लोग छात्रों की गलती गिना रहे है. 



मोदी को हर बात पर कोसने वालों का काम ही वही है इसलिए उनकी बात समझ में आती है की उन्हें बस मौका चाहिए ! वो लोग तो पिछले 7 साल से यही कर रहे है, लेकिन अभी तक सफल नहीं हुए. हर बार उनका प्रोपोगंडा ध्वस्त हो जाता है ! संभवतः इस बार भी हो जाएगा. हैरानी की बात ये है उनका जवाब देने के लिए लोग खुलकर वहां फंसे छात्रों को गलत बता रहे है. बिलकुल छात्रों की भी गलती है लेकिन क्या इसके लिए उन्हें वहीँ छोड़ देना चाहिए ? जैसा की अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को छोड़ दिया है ! नहीं बिलकुल नहीं वो सभी भारतीय है इसलिए सरकार का यह फर्ज बनता है की सबको शकुशल वापस लाये. 



छात्रों की गलती ये है की उन्होंने भारत सरकार के दिशा निर्देश को इग्नोर किया. 15 फरवरी से 24 फरवरी (जिस दिन युद्ध शुरू हुआ) तक भारतीय दूतावास ने लगभग 5 बार उक्रैन छोड़ने के निर्देश दिए. लेकिन वो छात्र और उनके माता पिता अपने यूनिवर्सिटी के कहने पर वहां रुके रहे. उन्हें भारत सरकार के निर्देश का पालन करते हुए वहां से निकल जाना चाहिए था. कुछ छात्रों की दलील है की प्लेन का किराया महंगा था, इस दलील को भी सिरे से ख़ारिज करना चाहिए. ये बात सच है की किराया महंगा हुआ है, covid की वजह से अंतराष्ट्रीय उड़ान को सिमित किया गया है. उसके बावजूद भारत सरकार के प्रयास से वहां फ्लाइट शुरू की गई थी. हो सकता है की कुछ छात्र स्थिति को समझ नहीं पाए हो, या इस वजह से रुक गए हो की अनहोनी की सूरत में सरकार उन्हें मुफ्त में बुलाएगी. जो छात्र किसी के बहकावे में आकर वीडियो बना रहे है उन्हें भी ये समझना होगा की ऐसा करने से पैनिक होगा जिसकी वजह से रेस्क्यू में दिक्कत आ सकती है. बावजूद इसके छात्रों को दोष देना ठीक नहीं है. 


मोदी समर्थक इस बात से शायद नाराज है की सरकार काम कर रही है फिर भी वहां से छात्र वीडियो बनाकर मोदी को बदनाम कर रहे है. ये स्वाभिविक सी बात है, आप खुद को उनकी जगह रखकर सोचिये ? युद्ध में फंसे हुए नौजवानों की मानसिक स्थिति को अगर आप नहीं समझ सकते फिर आप अपने अंदर के संवेदना को टटोलिये. हो सकता है की इन छात्रों को सिखाया गया हो की ऐसे वीडियो नहीं बनाओगे तो सरकार नहीं सुनेगी. ऐसा अक्सर होता है की कोई पत्रकार किसी पीड़ित का बयान रिकॉर्ड करने से पहले उसको समझाता है की कमरे के सामने उसे क्या बोलना है. ऐसी परिस्थिति में जान बचाने के लिए इंसान हर सम्भव प्रयास करता है, सरकार विरोधी तमाम वीडियो प्रोपोगंडा का हिस्सा नहीं हो सकते उसमे से कुछ सच भी हो सकते है. इसलिए ऐसे लोगों को समझना होगा की इन छात्रों के वीडियो से जितना नुकसान मोदी की छवि को नहीं होता उससे ज्यादा छात्रों को गलत ठहराने से होता है.



इस मसले में सरकार की सबसे बड़ी गलती ये है उसने अमेरिका की तरह स्पष्ट शब्दों में चेतावनी नहीं दी. अमेरिका ने 11 फरवरी को निर्देश देते हुए सभी नागरिको को सख्त हिदायत दिया था की आप खुद निकालिये सरकार की तरफ से कोई रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चलाया जाएगा. इसका असर ये हुआ की ज्यादातर अमेरिकी युद्ध शुरू होने पहले उक्रैन से निकल गए. भारत सरकार को भी स्पष्ट शब्दों में ऐसी चेतावनी देनी चाहिए थी. इससे परिस्थिति का गंभीरता समझ में आती और जो जाना चाहते थे लेकिन  सरकारी रेस्क्यू के भरोशे बैठे रहे कम से कम ऐसे छात्र या नागरिक वहां से निकल गए होते. लेकिन शायद सरकार को भी अंदाज़ा नहीं था की रूस आक्रमण कर देगा. युद्ध के छठे दिन भी भारत ही इकलौता देश है जो अपने नागरिकों को रेस्क्यू कर रहा है.


दुनिया के तमाम देशों ने समस्या के आगे घुटने टेक दिए है. कुछ देशों ने शुरुआत के दो दिन तो रेस्क्यू किया उसके बाद बंद कर दिया. विपक्ष खासकर मोदी विरोधी खेमा हर वक़्त मौका ढूढ़ता है ये उनका काम है. उनके प्रोपोगंडा में फंसने से पहले उनसे पूछिए की जो भारत कर रहा है ऐसा दुनिया का दूसरा कौन देश कर है ? क्या खुद PM को यूक्रेन चले जाना चाहिए. याद रखिये भारत सरकार की गुडविल और कूटनीति की वजह से ही युद्ध के बीच में यूक्रेन के पडोसी देश दिल खोलकर मदद कर रहे है. छात्रों को बलि का बाकड़ा समझने वालों को पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने जवाब दिया है. उन्होंने ट्वीट करके आइना दिखाया है की ऐसे मुश्किल समय में एक राजनेता या आम नागरिक को क्या करना चाहिए. पुरे घटनाक्रम को विस्तार से देखेंगे तो अंदाज़ा लगा सकते है की गलती सिर्फ अचानक बानी परिस्थिति की है. 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ