सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : गुजरात दंगे में मोदी बाइज़्ज़त बड़ी, सोनिया जाएंगी जेल ?

गुजरात दंगे पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बाइज़्ज़त बड़ी कर दिया, ये फैसला हर छोटे से छोटे सबूत को परखने के 20 साल बाद आया है. लेकिन इस फैसले में सबसे बड़ी खबर ये है की 2002 के गुजरात दंगे के लिए सोनिया गाँधी को जेल हो सकती है ? फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि जाकिया जाफरी किसी और के निर्देश पर काम करती थी। तीस्ता सीतलवाड़ के NGO ने कई पीड़ितों के हलफनामे पर हस्ताक्षर किए, उन्हें पता भी नहीं है। ये केवल मोदी जी की छवि खराब करने के लिए किया गया। इस देश में दंगो का लम्बा इतिहास है लेकिन गुजरात में हुए 2002 की प्लानिंग मार्केटिंग इस तरह की गई एक सफ़ेद झूठ को सच बना दिया गया. दंगे किस वजह से हुए इसको चर्चा से गायब कर दिया गया. कांग्रेस और वामपथि गठजोड़ वाले इकोसिस्टम ने मीडिया, और बुद्धिजीवियों के साथ मिलकर दंगे के सिर्फ एक पहलु को पूरी दुनिया के सामने रखा. उसका नतीजा ये है आज की पीढ़ी को गोधरा याद दिलानी पड़ती है जबकि गुजरात दंगा उसके सिलेबस में पढ़ाया जाता रहा. अदालत ने फैसला सुनाते हुए तहलका पत्रिका के स्टिंग ऑपरेशन का भी जिक्र किया और कहा कि यह खास एजेंडे के तहत अधूरे वीडियो के जरिये किया गया. अदालत ने उसको भी खारिज कर दिया है।
Gujarat Riots Supreme Court Verdict
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए जिस ngo पर सवाल उठाया है उसको तीस्ता सीतलवाड़ ने स्पेशल गुजरात दंगे में मारे गए मुसलमानो को न्याय दिलाने के नाम पर बनाया था. तीस्ता सीतलवाड़, शबनम हाश्मी, राणा अयूब, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई, रविश कुमार, अजित अंजुम जैसे पत्रकारों और तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दंगा पीड़ितों ने नाम पर कांग्रेस सरकार में सेलेब्रटी बन गए. NDTV INDIA Today स्टार न्यूज़, इंडियन एक्सप्रेस, भास्कर, या टाइम्स ऑफ़ इंडिया. मोदी को विलेन बनाने के लिए दिल्ली के लुटियंस मीडिया ने 15 साल दिन रात एक कर दिया. कांग्रेस के एक सांसद से ED की पूछताछ पर जो लोग छाती पिट रहे है वो उसी इकोसिस्टम के वफादार सिपाही है जिन्होंने मोदी की नेगेटिव ब्रांडिंग की. एक CM के तौर पर जब भी विदेश यात्रा पर गए वहां के अख़बारों में गुजरात दंगो की खबरे उसी दिन छपती थी. सुप्रीम कोर्ट के सवाल उठाने के बाद खबर है की तीस्ता सीतलवाड़ को SIT ने मुंबई से गिरफ्तार किया है. तीस्ता सीतलवाड़ UPA सरकार में सोनिया गाँधी द्वारा बनाई गई NAC की सदस्य रही. आप इनके रसूख का अंदाज़ा लगा सकते है.
Gujarat Riots Supreme Court Verdict
2002 में हुए दंगे के मामले में गुजरात ATS ने तीस्ता सीतलवाड़ और गुजरात के पूर्व DGP आरबी श्रीकुमार को हिरासत में ले लिया है। आपको बता दें की अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तीस्ता सीतलवाड़, पूर्व IPS संजीव भट्ट और गुजरात के पूर्व DGP आरबी श्रीकुमार के खिलाफ फर्जी दस्तावेज बनाकर साजिश रचने का मामला दर्ज किया है। संजीव भट्ट पहले से जेल में हैं, जबकि तीस्ता और श्रीकुमार को अब हिरासत में लिया गया है। गुजरात दंगों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी में पीएम नरेंद्र मोदी समेत 55 राजनेताओं व अधिकारियों को मिली क्लीन चिट के खिलाफ जाकिया जाफरी ने याचिका की थी। कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया कि कानून का दुरुपयोग करना ठीक नहीं। कोर्ट ने एसआईटी की तारीफ की और सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जितने लोग कानून से खिलवाड़ करते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ का भी नाम लिया और कहा कि सीतलवाड़ के खिलाफ और जांच की जरूरत है। 20 साल बाद जब सर्वोच्च न्यायलय ने बड़ी कर दिया तब पहली बार देश के गृहमंत्री और उस समय गुजरात के विधायक अमित शाह ने इस मामले पर खुलकर बात की. तीस्ता सीतलवाड़ सिर्फ शुरुआत है कहा जा रहा है की गुजरात ATS के साथ साथ ED को भी जाँच में शामिल किया जा सकता है. गुजरात दंगे से जुड़े NGO के लेन देन की जांच हो सकती है, अगर ऐसा हुआ तो कई और पत्रकार और एक्टिविस्ट सलाखों के पीछे जाएंगे. ED जाँच में अगर तीस्ता सीतलवाड़ के ngo को कांग्रेसी फंडिंग का कोई लिंक मिलता है तो जाँच कांग्रेस हाई कमान यानी सोनिया गाँधी तक पहुंच सकती है. तो क्या अब गुजरात दंगे की आंच सोनिया गाँधी तक पहुंचने वाला है ?
0 टिप्पणियाँ