कन्हैयालाल का कटा सर हिन्दुओं को चेतावनी है, कांग्रेस राज में सर तन से जुदा हो जाएगा ?

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राजस्थान के उदयपुर में दिल दहलाने वाली वारदात हुई. दो मुस्लिम धर्मांध हत्यारों ने एक हिन्दू की उसके दूकान में घुसकर दिन दहाड़े हत्या कर दी. लेकिन ये सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि हिंदुस्तान के हिन्दुओं को चेतावनी है. उदयपुर में भूतमहल के पास सुप्रीम टेलर्स नाम का दूकान कन्हैयालाल चलते थे. उन्होंने कुछ दिन पहले नूपुर शर्मा के समर्थन में व्हाट्सप्प स्टेटस लगाया था, इसके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया. जेल से छूटने के बाद भी उनको लगातार धमकियाँ मिल रही थी, इस वजह से उन्होंने घर से निकलना बंद कर दिया, पुलिस से शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई. घरवालों और व्यापारी साथियों के हिम्मत देने के बाद महीनो बाद उन्होंने दूकान खोला और एक दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई. दोपहर करीब 2:30 बजे रियाज अख्तारी और गौस मोहम्मद नाम कपडा सिलने के बहाने तलवार और चाकू लेकर उनकी दुकान में आए, और वीडियो बनाते हुए उसका गाला काट दिया. इसके बाद भी वो डरे नहीं हत्या का वीडियो वायरल करने के बाद दो और वीडियो जारी किया जिसमे एक में उन्होंने हत्या करने की ख़ुशी जताते हुए सर तन से जुदा का नार लगाया, जबकि दूसरा वीडियो 17 जून का बनाया हुआ था जिसे वो हत्या के बाद रिलीज़ करने वाले थे और अंजाम देने के बाद ही रिलीज़ किया.
हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार ISIS के तर्ज पर एक हिन्दू का सर तन से जुदा किया गया. हत्या कहीं भी किसी की भी हो सकती है, लेकिन ये सिर्फ एक हत्या नहीं है. ये आने वाले भविष्य का संकेत है, की आपका एक गलत वोट इस देश को सीरिया बना सकता है. बड़ी बात हत्या कर देना नहीं है, उससे भी बड़ा संकेत खुद कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने दे दिया की हिन्दुओं की रक्षा सिर्फ नरेंद्र मोदी अमित शाह और बीजेपी ही कर सकती है. हत्या के तुरंत बाद अशोक गेहलोत ने मीडिया से बात करते हुए शांति की अपील, कठोर कार्यवाई के साथ साथ ये भी कह दिया की मैंने तो पहले ही कहा था की प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को अपील करनी चाहिए. आप सोचियें कितनी बेशर्मी से धर्मांध आतंकवादियों के जघन्य अपराध को छोटा करने के लिए वो इसमें भी हिन्दुओं को घसीट लाए. कांग्रेस का मन्ना है की मोदी राज में हिन्दू उग्र हो गया है, इसलिए जब कांग्रेसी मोदी से अपील करने की बात करते है तो इसका क्या मतलब निकला जाए ? इस देश के कितने प्रतिशत मुस्लमान मोदी और अमित शाह की बात सुनता है और उनपर भरोषा करता है.

पहले करौली, फिर जोधपुर अब उदय पुर तीनो जगह हिंसा और हत्या का जिम्मेदार सिर्फ मुस्लिम पक्ष है, लेकिन कमाल की बात है हर घटना के बाद कांग्रेस पार्टी इसे छोटा करके दिखाने की कोशिश करती है. अशोक गेहलोत के अलावा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उदयपुर में तालिबानी तरीके से हुई हत्या के लिए सीधे सीधे नरेंद्र मोदी bjp को जिम्मेदार ठहरा दिया. लेकिन एक शब्द इस घटना की निंदा करने के लिए खर्च नहीं किये. दिल्ली कांग्रेस के पूर्व MLA मुकेश शर्मा घटना की खबर दिखाए जाने से नाराज होकर मीडिया को कोसने के लिए लम्बा चौरा पोस्ट लिख डाला लेकिन इस निर्मम हत्याकांड के बारे में एक शब्द नहीं लिखा. इस घटना से ठीक एक दिन पहले एक वेबसाइट के तथाकथित पत्रकार की गिरफ़्तारी का सबसे पहला विरोध राहुल गाँधी ने किया. राहुल के बाद पूरी कांग्रेस उस नफरती पत्रकार के लिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. वो पत्रकार मुस्लमान है जिसका नाम मोहम्मद जुबैर है इसलिए कांग्रेस उसके साथ कड़ी हो गई. ये वही जुबैर है जिसने नूपुर शर्मा की अधूरी वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर शेयर किया था. उसके बाद उर्दू और अरबी में ट्रांसलेट करके इसे पाकिस्तान और कड़ी देशों में वायरल करवाया.

राहुल गाँधी का देश में किरोसिन छिड़कना, अशोक गेहलोत का राजस्थान में और भूपेश बघेल का छत्तीसगढ़ में हिन्दुओ की अनदेखी करना, कांग्रेस ये स्पष्ट सन्देश दे रही है की अगर उसके राज में रहना है सेक्युलर हिन्दू बनकर रहो. उदयपुर की घटना पर कांग्रेस और उसके नेताओ के बयान ये बताने के लिए काफी है कांग्रेस इसे सिर्फ एक छूटा सा अपराध मानती है, शायद उसके लिए ये कोई गंभीर घटना है. इसलिए इसे हल्का करने के लिए इसमें प्रधामंत्री और गृहमंत्री को घसीट लाये. अगर कांग्रेस को वाकई देश की चिंता होगी तो इस पुरे घटना की जाँच NIA से करवानी चाहिए. क्यूंकि ये दोनों आतंकी किसी ना किसी इशारे पर आये होंगे, उन तमाम मौलवियों और नेताओं के खिलाफ सख्त कार्यवाई करनी चाहिए जिन्होंने सर तन से जुदा का नारा लगाया. उदयपुर की घटना के बारे में एक मिनट ठहरकर सोंचेंगे तो आपके मन में भी सवाल उठेगा की, क्या कांग्रेस अब पूरी तरह से अल्ट्रा लेफ्ट बन चुकी है ? क्या कांग्रेस राज में हिन्दुओं को शरिया के हिसाब से चलना होगा ? क्या कांग्रेस के राज़ में हिन्दुओं को अपनी बात रखने या बोलने की आज़ादी नहीं है ?
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