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मुरूदेश्वर मंदिर कर्णाटक : कुतुबमीनार से ऊँची फिर भी भारतियों से अनजान !

 


मुरूदेश्वर मंदिर कर्णाटक : कुतुबमीनार से ऊँची फिर भी भारतियों से अनजान !

यह मंदिर इस देश के साथ इतिहसकरों के किये गए छलावे का प्रतिक है. इस मंदिर का निर्माण कब हुआ था इसके बारे में अभी तक सिर्फ अंदाजा लगाया जाता है. बाद में यहाँ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिव प्रतिमा स्थापित की गई. इस देश का बच्चा बच्चा यह जनता है की भारत की सबसे ऊँची ईमारत (प्राचीन) कुतुबमीनार है. लेकिन शायद बुजुर्ग भी नहीं जानते की गुरुद्वेश्वर मंदिर कहाँ है ? इसकी खासियत क्या है ? इसका कारण है देश के इतिहासकार, और सरकारी सोंच. क्यूंकि किसी भी पाठ्यपुस्तक (किताब) में इस तरह के कई अद्भुत जगहों को जगह ही नहीं मिली. हाल के वर्षों में सोशल मीडिया ने काफी सकारात्मक पहल की है. डिजिटल मीडिया में अब इस तरह के दिव्य और गौरवशाली जगहों के बारे में लिखा या दिखाया जा रहा है. क्यों खास है यह मंदिर ? पढ़िए पूरी खबर निचे.

मुरूदेश्वर मंदिर कर्णाटक : कुतुबमीनार से ऊँची फिर भी भारतियों से अनजान !

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