गोदी मीडिया VS दरबारी मीडिया : क्यों और कैसे आज भी वामपंथी हावी है ?
2014 में मोदी के पीएम बनने के बाद गोदी मीडिया VS दरबारी मीडिया की चर्चा शुरू हुई. 26 जनवरी हिंसा में कुछ पत्रकारों के खिलाफ मुक़दमे दर्ज किये गए है. इनपर फेक न्यूज़ फ़ैलाने का आरोप है, इनमे राजदीप सरदेसाई से लेकर कारवां और द वायर के एडिटर तक शामिल है. दिल्ली बॉर्डर से एक फ्रीलान्स पत्रकार मनदीप पुनिया को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है. पत्रकारों की खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद विपक्षी नेताओं और वामपंथी पत्रकारों ने इसका जमकर विरोध किया है. प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया ने भी इसकी निंदा की है. लेकिन ये तमाम लोग उस वक़्त खुश थे जब महाराष्ट्र में अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी हुई थी. इनलोगो ने अपने लिए जेल के रस्ते उसी दिन खोल लिए थे जिस दिन अर्नब की गिरफ़्तारी को जायज बताया था. एक पत्रकार दूसरे का समर्थन तभी करता है जब सामने वाला उसके खेमे का है. इस मामले में दक्षिणपंथियों से लाख गुना बेहतर वामपथि खेमा है. क्यों और कैसे तथाकथित गोदी मीडिया पर दरबारी मीडिया हावी है ? Read Full Story...

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