राकेश टिकैत के आँसू से किसानों को नुकसान बीजेपी को होगा फायदा ?
26 जनवरी की हिंसा के बाद विफल होता आंदोलन एक बार फिर अपने चरम पर है.
लेकिन अब यह पूरी तरह से राजनैतिक आंदोलन बन चूका है. 26 जनवरी के बाद आप
आंदोलन के कवरेज पर नज़र दौड़ाइए तो स्पष्ट हो जाएगा. पंजाब से शुरू हुआ
आंदोलन का गढ़ अब उत्तर प्रदेश बन गया है. ध्यान रहे अगले साल उत्तर प्रदेश
में विधानसभा चुनाव होने है. पहले जो राजनीतिक पार्टियां पीछे रहकर आंदोलन
को सपोर्ट कर रही थी वो अब सबसे आगे है. राकेश टिकैत का मंच हो या
मुज़फ्फरनगर पंचायत का मंच, हर जगह बीजेपी विरोधी पार्टी के कार्यकर्ताओं और
नेताओं ने अपनी हाज़िरी लगाई है. मुज़फ्फरनगर किसान पंचायत के मंच पर उन
मुस्लिम नेताओं की मौजूदगी ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए है. क्या टिकैत के
आँशु में दंगे का दाग धूल गया ? पंचायत और मंच पर नेताओं की मौजूदगी से
किसका नुकसान होगा ? पढ़िए एक्सक्लूसिव स्टोरी ....

0 टिप्पणियाँ