भारत में पटाखों का इतिहास सदियों नहीं युगों पुरानी है ?
पटाखों का इतिहास हर साल दिवाली के समय खंगाला जाता है. दिवाली से पहले ही
पटाखों पर बहस शुरू हो जाती है. दिल्ली समेत तमाम महानगरों में पटाखों से
होने वाले प्रदुषण की बहस होती है. पिछले कुछ सालों से दिवाली आते ही
दिल्ली समेत कई अन्य शहरों में पटाखों पर बैन लगाया जा रहा है. पटाखों के
बैन की समस्या अभी शहर खासकर महानगर तक सिमित है. पिछले कुछ सालों से जो
सक्रियता दिख रही है उससे आने वाले समय का अंदाजा लगाया जा सकता है.
प्रदुषण के कई कारण है लेकिन राजनीतिक दलों ने पटाखे और पराली को विलेन के
रूप में ढूंढ निकला है. पटाखे नहीं जलाने के
लिए प्रदुषण के अलावे अध्यात्म और दिवाली में श्री राम का उदहारण भी दिया
जाता है. विरोध करने वाले कहते है की राम के अयोध्या लौटने पर सिर्फ दिए
जलाए गए थे पटाखे नहीं. Read Full Story.....

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