वामपंथियों ने मो. शमी को ढाल क्यों बनाया ? ट्रोल की असली सच्चाई क्या है ?
वर्ल्ड टी-20 क्रिकेट मैच में पाकिस्तान के हाथों भारत की हार के बाद फैंस की मायूसी स्वाभिविक है. पहली बार पाकिस्तान ने वर्ल्ड कप मैच में भारत को हराया है. हार के बाद भारतीय क्रकेट फैंस ने पूरी टीम की जमकर आलोचना की, सबसे ज्यादा आलोचना कप्तान कोहली की हुई. मैच ख़त्म होने के बाद पाकिस्तान की जीत पर हिंदुस्तान में बैठे पाक प्रेमियों का उत्साह और जश्न पुरे देश में चर्चा का विषय बना. राजधानी दिल्ली से लेकर कश्मीर तक कुछ मुसलमानो ने जमकर आतिशबाज़ी की.

पाकिस्तान की जीत पर पटाखे फोड़ने वालों पर क्रिकेटर सेहवाग समेत कई लोगों ने गुस्से का इज़हार किया. सेहवाग को अपने इस ट्वीट के लिए भी काफी ट्रोल झेलना पड़ा. कहानी में ट्वीस्ट तब आया जब अचानक मो. शमी हिंदुस्तान में ट्रेंड करने लगे. आरोप लगा की शमी को ट्रोल किया जा रहा है. सबसे आश्चर्यजनक बात यह है शमी के ट्विटर टाइम लाइन पर एक भी एब्यूज नहीं दीखता. लेकिन शाम होते होते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी, सचिन तेंदुलकर समेत तमाम बुद्धिजीवी IStandwithShami ट्रेंड करते हुए समर्थन में उतर आये. जब इतने दिग्गज शमी के सम्मान में खड़े हो तो अपने आप में यह खबर बन जाती है.

भारत पाकिस्तान मैच के दौरान मो शमी ने काफी ख़राब गेंदबाज़ी की. उनके अंतिम ओवर में पाकिस्तान ने 15 से ज्यादा रन बनाकर मैच जीत लिया. काफी रीसर्च करने के बाद कुछ 3 से 4 सामान्य लोगों के कमैंट्स शमी के इंस्टाग्राम पर दिखे. ये ट्रोल करने वाले ना तो जाने पहचाने चेहरे थे और ना ही इनकी संख्या इतनी थी जिससे किसी को फर्क पड़ता. बावजूद पुरे देश में सिर्फ 3 से 4 लोगों के कमैंट्स ने नैरेटिव सेट कर दिया और शाम होते होते यह सबसे बड़ी खबर बन गई. ऐसा क्यों हुआ ? इसके पीछे की मनसा समझने के लिए कुछ बातों पर गौर करेंगे तो सबकुछ स्पष्ट हो जाता है.

भारत के मैच हारते ही कांग्रेस प्रवक्ता और पूर्व विधानसभा प्रत्यासी राधिका खेड़ा (नेशनल मीडिया कन्वेनर) ने ट्वीट करते हुए लिखा "क्यों भक्तो आ गया स्वाद करवा ली बेइज्जती, आ गया स्वाद". कांग्रेस के इस ट्वीट ने कई सवाल खड़े किये. क्या ये मैच बीजेपी बनाम पाकिस्तान का था ? क्या भारत की हार से सिर्फ बीजेपी समर्थक दुखी हुए ? कांग्रेस को पाकिस्तान की जीत से इतनी ख़ुशी क्यों हुई ? इसके अलावा जिस तरह से देश के अलग अलग हिस्सों में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाया गया उसको लेकर गंभीर सवाल उठने लगे. टीवी चैनलों पर सवाल उठने लगे. यही से खेल शुरू हुआ.


सबसे पहले शमी के मुद्दे को वामपंथी पत्रकार बरखा दत्त ने उठाया. उसके बाद पुरे लेफ्ट इकोसिस्टम ने इसे लपकते हुए पूरा नैरेटिव बदल दिया. इसी नैरेटिव में सचिन तेंदुलकर से लेकर तमाम क्रिकेटर भी फंस गए. एक खिलाडी के साथ खड़ा होना उनका सबसे पहला कर्तव्य है. लेकिन मुद्दे की सच्चाई जाने बगैर उस पर प्रतिक्रिया देने से उन्हें बचना चाहिए था. राहुल गाँधी समेत विपक्ष और वामपंथियों को तो अपनी पार्टी और पाक परस्त लोगों को बचाव करना था इसलिए उन्होंने शमी को ढाल बनाया. इसी मैच के लिए कोहली को हज़ारों ट्रॉल्स किये गए, लेकिन उनके बचाव में किसी ने कुछ नहीं बोलै. शमी के ऊपर सिर्फ ३-४ कमैंट्स होने के बाद पूरा नैरेटिव बदल दिया गया क्यों ? क्या ये पाक प्रेमी भारतियों को बचाने के लिए किया गया ? क्या वो कमैंट्स भी प्रायोजित है जो शमी के खिलाफ किये गए ? ऐसे अनेक सवाल उनलोगों से पूछा जाना चाहिए जो इस नरेटिव को आगे बढ़ा रहे है. क्यूंकि शमी के इन तथाकथित समर्थकों ने ना तो पाकिस्तानी समर्थकों के लिए कुछ कहा ना ही कोहली के समर्थन में. आप पूरा सोशल मीडिया खंगाल लेंगे तो अपने आप स्पष्ट हो जाएगा की वामपंथी इकोसिस्टम ने पाक प्रेमियों और कांग्रेस को बचाने के लिए जान बूझकर इसे मुद्दा बनाया है.

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