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वीर सावरकर माफीनामा : सरकारी दस्तावेज में गद्दार या देशभक्त ?

 


वीर सावरकर माफीनामा : सरकारी दस्तावेज में गद्दार या देशभक्त ?

कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां हमेशा वीर सावरकर माफीनामे का आधार बनाकर उन्हें गद्दार साबित करना चाहती है. आज़ादी के बाद पहले महात्मा गाँधी की हत्या में उनका नाम जोड़कर फंसने की कोशिश हुई. लेकिन सबसे ज्यादा प्रहार उनके मृत्यु के बाद शुरू हुआ. सावरकर की मौत के बाद उनको इतिहास से मिटा देने की कोशिशें होती रही. पिछले कुछ सालो में अक्सर नेहरू vs सावरकर की चर्चा होते रहती है. बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी रैली में मंच से खड़े होकर बोल चुके है “मै सावरकर नहीं हूँ, मै माफ़ी नहीं मांगूगा. वामपंथी इकोसिस्टम सावरकर को हथियार बनाकर बीजेपी और हिंदुत्व को निशाना बनाते है. तो क्या सचमुच सावरकर ने अंग्रेजों से माफ़ी मांगी थी ? इस सवाल के जवाब को लेकर भारत सरकार ने बड़ा खुलासा किया है. Read Full Story...

वीर सावरकर माफीनामा : सरकारी दस्तावेज में गद्दार या देशभक्त ?

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