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प्रेस फ्रीडम क्या है ? पुराने मामलों की तुलना अर्नब की गिरफ़्तारी से किया जा सकता है ?

 



प्रेस फ्रीडम क्या है ? पुराने मामलों की तुलना अर्नब की गिरफ़्तारी से किया जा सकता है ?

प्रेस फ्रीडम क्या है ? अर्नब की गिरफ़्तारी की तुलना पुराने मामलो से करने से पहले आपको समझना होगा. मीडिया को वाचडॉग कहा जाता है, लेकिन दुनिया के अधिकांश हिस्सों में (भारत समेत) पालतू डॉग बन चूका है. अगर कोई मीडिया संसथान, पत्रकार को किसी खबर को लेकर परेशान किया जाए तो मीडिया स्वंतंत्रता के दायरे में आता है. मिनिस्ट्री ऑफ़ इनफार्मेशन के गाइड लाइन का पालन करते हुए आप कोई भी स्टोरी लिख या दिखा सकते है. आपके रिपोर्ट में अगर कोई गलत फैक्ट या गलत भावना है तो सामने वाले को ये अधिकार है की वो आपको कोर्ट में घसीट सकता है. मीडिया की स्वतंत्रता सिर्फ और सिर्फ खबरों (तथ्यात्मक) के लिए है, किसी से सवाल पूछने का अधिकार है. जब पत्रकारों को पत्रकारिता (तथ्यात्मक) करने से रोका जाए तब प्रेस फ्रीडम का हनन होता है. मीडिया इस देश के कानून से ऊपर नहीं है, उस पर भी भारत के एक सामान्य नागरिक का कानून लागु होता है. Read Full Story.....

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